''सद्भावना दर्पण'

दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में पुरस्कृत ''सद्भावना दर्पण भारत की लोकप्रिय अनुवाद-पत्रिका है. इसमें भारत एवं विश्व की भाषाओँ एवं बोलियों में भी लिखे जा रहे उत्कृष्ट साहित्य का हिंदी अनुवाद प्रकाशित होता है.गिरीश पंकज के सम्पादन में पिछले चौदह वर्षों से प्रकाशित ''सद्भावना दर्पण'' पढ़ने के लिये अनुवाद-साहित्य में रूचि रखने वाले साथी शुल्क भेज सकते है. आजीवन शुल्क 3000 रूपए..वार्षिक240 रूपए, द्वैवार्षिक- 475 रूपए. ड्राफ्ट या मनीआर्डर के जरिये ही शुल्क भेजें. संपर्क- जी-३१, नया पंचशील नगर,रायपुर-४९२००१ (छत्तीसगढ़)
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उमंग और आस्था का एक और गीत

>> Thursday, December 11, 2014

ये हसीन प्रात है, ये हसीन प्रात है।
हो न कोई साथ किन्तु प्रकृति का साथ है।

पक्षियों का गान है / पेड़ गुनगुना रहे.
नाचती है ये नदी,/ फूल खिलखिला रहे।
हर तरफ उमंग / इक नयी तरंग है
ज़िंदगी में आज कुछ / इक नयी-सी बात है।
ये हसीन प्रात है, ये हसीन प्रात है।... .

रात जो गयी उसे. भूलना पड़ा सदा
सामने है लक्ष्य तो/ तू कदम बढ़ा सदा
ज़िंदगी भी जंग है / हौसला भी संग है
इसलिए चले -चलो / दुश्मनों की मात है।
ये हसीन प्रात है, ये हसीन प्रात है।. .

खेत ये बचे रहें / ग्राम का विकास हो.
गाय घर बंधी रहे/ दूध-घी की आस हो।
गाँव से ही रंग है / हर नदी ही गंग है.
शुद्ध ये हवा रहे / तो बलिष्ठ गात है.
ये हसीन प्रात है, ये हसीन प्रात है।.

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