''सद्भावना दर्पण'

दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में पुरस्कृत ''सद्भावना दर्पण भारत की लोकप्रिय अनुवाद-पत्रिका है. इसमें भारत एवं विश्व की भाषाओँ एवं बोलियों में भी लिखे जा रहे उत्कृष्ट साहित्य का हिंदी अनुवाद प्रकाशित होता है.गिरीश पंकज के सम्पादन में पिछले चौदह वर्षों से प्रकाशित ''सद्भावना दर्पण'' पढ़ने के लिये अनुवाद-साहित्य में रूचि रखने वाले साथी शुल्क भेज सकते है. आजीवन शुल्क 3000 रूपए..वार्षिक240 रूपए, द्वैवार्षिक- 475 रूपए. ड्राफ्ट या मनीआर्डर के जरिये ही शुल्क भेजें. संपर्क- जी-३१, नया पंचशील नगर,रायपुर-४९२००१ (छत्तीसगढ़)
&COPY गिरीश पंकज संपादक सदभावना दर्पण. Powered by Blogger.

मृत्यु नहीं, यह उत्सव है

>> Monday, August 3, 2015



मृत्यु नहीं, यह उत्सव है

दुनिया में जो आता है
इक दिन वापस जाता है .
कौन रहा चिरकाल यहाँ,
काल यही समझाता है.
अमर आत्मा हम सबकी,
प्रतिपल जैसे अभिनव है..

मृत्यु नहीं, यह उत्सव है


जिसने मृत्यु को जीता,
वो ही है इंसान बड़ा .
वही करेगा जीवन में,
सचमुच कर्म महान बड़ा.
मृत्यु और क्या? जीवन का,
फिर से नूतन उदभव है ..

मृत्यु नहीं, यह उत्सव है

जब तक जीवन, कर्म करें
कर्म को अपना धर्म करें.
मौत न हो गुमनामी की,
हम ऐसी इक मौत मरें.
शिव जैसा जीवन सुन्दर,
वरना वह जीवित शव है .

मृत्यु नहीं, यह उत्सव है

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