''सद्भावना दर्पण'

दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में पुरस्कृत ''सद्भावना दर्पण भारत की लोकप्रिय अनुवाद-पत्रिका है. इसमें भारत एवं विश्व की भाषाओँ एवं बोलियों में भी लिखे जा रहे उत्कृष्ट साहित्य का हिंदी अनुवाद प्रकाशित होता है.गिरीश पंकज के सम्पादन में पिछले चौदह वर्षों से प्रकाशित ''सद्भावना दर्पण'' पढ़ने के लिये अनुवाद-साहित्य में रूचि रखने वाले साथी शुल्क भेज सकते है. आजीवन शुल्क 3000 रूपए..वार्षिक240 रूपए, द्वैवार्षिक- 475 रूपए. ड्राफ्ट या मनीआर्डर के जरिये ही शुल्क भेजें. संपर्क- जी-३१, नया पंचशील नगर,रायपुर-४९२००१ (छत्तीसगढ़)
&COPY गिरीश पंकज संपादक सदभावना दर्पण. Powered by Blogger.

उनको मेरा नमन

>> Tuesday, October 28, 2014



जिनने सच्चे प्रश्न उठाए उनको मेरा नमन
सच के पथ पर जो चल पाएउनको मेरा नमन

तकलीफो से भरी ज़िंदगी लगी फूल जिनको
काँटों पर भी जो मुस्काए उनको मेरा नमन

वैसे तो हैं जाने कितने हैं सबसे दुआ-सलाम
पर जो सच्चे मन से आए उनको मेरा नमन

लूट-लूट कर घर भरने वालों की नगरी में
जो अपना सर्वस्व लुटाए उनको मेरा नमन

देव और दानव दोनों की ख्वाहिश है 'अमरित'
जो सबकी पीड़ा पी जाए उनको मेरा नमन

बड़ी-बड़ी डिग्री ले कर भी बने नहीं इन्सां
जो ढाई आखर पढ़ जाए उनको मेरा नमन

भीड़ चले जिस और उधर तो चलते हैं सारे
पंकज जो खुद राह बनाए उनको मेरा नमन

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सुनिए गिरीश पंकज को

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