''सद्भावना दर्पण'

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&COPY गिरीश पंकज संपादक सदभावना दर्पण. Powered by Blogger.

सबसे सुन्दर यह साल रहे।

>> Sunday, January 4, 2015


अपनी सबकी है यही दुआ, सबसे सुन्दर यह साल रहे।
वो कल जैसा भी था लेकिन अब कोई नया कमाल रहे।।

कुछ खट्टी -मीठी यादें हैं, ये तो जीवन का हिस्सा है।
है कौन अलग बोलो जग में, सबका ही ऐसा किस्सा है।
जो बीत गया उसको भूलें, अब कोई नया धमाल रहे।।
अपनी सबकी है यही दुआ, सबसे सुन्दर यह साल रहे.

हमने कितने सपने पाले, वे बेशक अब तक आधे हैं।
लेकिन सब होंगे पूर्ण यहां, अपने भी अटल इरादे हैं।
बस ध्यान रहे पग रुके नहीं, अपनी वो गतिमय चाल रहे।।
अपनी सबकी है यही दुआ, सबसे सुन्दर यह साल रहे।

हो विश्व मेरा खुशहाल सदा, हिंसा का दानव मर जाये।
हर आतंकी अपने-अपने ईश्वर से थोड़ा-सा डर जाये।
हर आँगन में मुस्कान रहे, रत्ती भर नहीं मलाल रहे।।
अपनी सबकी है यही दुआ, सबसे सुन्दर यह साल रहे।

समता-ममता का नारा हो, ये पूरा विश्व हमारा हो।
हम हाथ बढ़ाएंगे अपना, अब कोई ना बेचारा हो।
भूखा-प्यासा न हो कोई, सबको ही रोटी-दाल रहे।।
अपनी सबकी है यही दुआ, सबसे सुन्दर यह साल रहे। .

जनता का राज रहे जग में, जनता की बात सुनी जाये ।
लाठी-गोली न चले कहीं, दुनिया इक ऐसी बुनी जाये।
जो वादे थे, सब पूरे हों, अब कोई नहीं सवाल रहे।।
अपनी सबकी है यही दुआ, सबसे सुन्दर यह साल रहे.।

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